Category: Mirza Ghalib Asadullah Beg Khan

आमों की तारीफ़ में – ग़ालिब 0

आमों की तारीफ़ में – ग़ालिब

हाँ दिल-ए-दर्दमंद ज़म-ज़मा साज़ क्यूँ न खोले दर-ए-ख़ज़िना-ए-राज़ ख़ामे का सफ़्हे पर रवाँ होना शाख़-ए-गुल का है गुल-फ़िशाँ होना मुझ से क्या पूछता है क्या लिखिये नुक़्ता हाये ख़िरदफ़िशाँ लिखिये बारे, आमों का कुछ...

सफ़ा-ए-हैरत-ए-आईना है सामान-ए-ज़ंग आख़िर – ग़ालिब 0

सफ़ा-ए-हैरत-ए-आईना है सामान-ए-ज़ंग आख़िर – ग़ालिब

सफ़ा-ए-हैरत-ए-आईना है सामान-ए-ज़ंग आख़िर तग़य्युर आब-ए-बर-जा-मांदा का पाता है रंग आख़िर न की सामान-ए-ऐश-ओ-जाह ने तदबीर वहशत की हुआ जाम-ए-ज़मुर्रद भी मुझे दाग़-ए-पलंग आख़िर

हरीफ़-ए-मतलब-ए-मुशकिल नहीं फ़ुसून-ए-नियाज़ – ग़ालिब 0

हरीफ़-ए-मतलब-ए-मुशकिल नहीं फ़ुसून-ए-नियाज़ – ग़ालिब

हरीफ़-ए-मतलब-ए-मुश्किल नहीं फ़ुसून-ए-नियाज़ दुआ क़ुबूल हो या रब कि उम्र-ए-ख़िज़्र दराज़ न हो ब-हर्ज़ा बयाबाँ-नवर्द-ए-वहम-ए-वुजूद हुनूज़ तेरे तसव्वुर में है नशेब-ओ-फ़राज़ विसाल जल्वा तमाशा है पर दिमाग़ कहाँ कि दीजे आइना-ए-इन्तिज़ार को पर्दाज़ हर...

हासिल से हाथ धो बैठ ऐ आरज़ू-ख़िरामी – ग़ालिब 0

हासिल से हाथ धो बैठ ऐ आरज़ू-ख़िरामी – ग़ालिब

हासिल से हाथ धो बैठ ऐ आरज़ू-ख़िरामी दिल जोश-ए-गिर्या में है डूबी हुई असामी उस शम्अ की तरह से जिस को कोई बुझा दे मैं भी जले-हुओं में हूँ दाग़-ए-ना-तमामी

हुज़ूर-ए-शाह में अहल-ए-सुख़न की आज़माइश है – ग़ालिब 0

हुज़ूर-ए-शाह में अहल-ए-सुख़न की आज़माइश है – ग़ालिब

हुज़ूर-ए-शाह में अहल-ए सुख़न की आज़माइश है चमन में ख़ुश-नवायान-ए-चमन की आज़माइश है क़द-ओ-गेसू में क़ैस-ओ-कोहकन की आज़माइश है जहां हम हैं वहां दार-ओ-रसन की आज़माइश है करेंगे कोहकन के हौसले का इमतिहां आख़िर...

हुजूम-ए-नाला हैरत आजिज़-ए-अर्ज़-ए-यक-अफ़्ग़ँ है – ग़ालिब 0

हुजूम-ए-नाला हैरत आजिज़-ए-अर्ज़-ए-यक-अफ़्ग़ँ है – ग़ालिब

हुजूम-ए-नाला हैरत आजिज़-ए-अर्ज़-ए-यक-अफ़्ग़ँ है ख़मोशी रेशा-ए-सद-नीस्ताँ से ख़स-ब-दंदाँ है तकल्लुफ़-बर-तरफ़ है जाँ-सिताँ-तर लुत्फ़-ए-बद-ख़ूयाँ निगाह-ए-बे-हिजाब-ए-नाज़ तेग़-ए-तेज़-ए-उर्यां है हुई यह कसरत-ए ग़म से तलफ़ कैफ़िययत-ए शादी कि सुबह-ए-ईद मुझ को बद-तर अज़ चाक-ए गरेबां है दिल...

हुश्न-ए-बेपरवा ख़रीदार-ए-मता-ए-जलवा है – ग़ालिब 0

हुश्न-ए-बेपरवा ख़रीदार-ए-मता-ए-जलवा है – ग़ालिब

हुस्न-ए-बे-परवा ख़रीदार-ए-माता-ए-जल्वा है आइना ज़ानू-ए-फ़िक्र-ए-इख़्तिरा-ए-जल्वा है ता-कुजा ऐ आगही रंग-ए-तमाशा बाख़्तन चश्म-ए-वा-गर्दीदा आग़ोश-ए-विदा-ए-जल्वा है

आमों की तारीफ़ में – ग़ालिब 0

आमों की तारीफ़ में – ग़ालिब

हाँ दिल-ए-दर्दमंद ज़म-ज़मा साज़ क्यूँ न खोले दर-ए-ख़ज़िना-ए-राज़ ख़ामे का सफ़्हे पर रवाँ होना शाख़-ए-गुल का है गुल-फ़िशाँ होना मुझ से क्या पूछता है क्या लिखिये नुक़्ता हाये ख़िरदफ़िशाँ लिखिये बारे, आमों का कुछ...

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