Category: Manish Mundra

रख हथेलियों पर अपने सपनों को 0

रख हथेलियों पर अपने सपनों को

रख हथेलियों पर अपने सपनों को… उड़ा दूँ आसमानों में.. बादलों की शक्ल दूँ स्वच्छंद उड़ें वो हवा के बहाव में। लौटें शाम को.. फिर से, मेरी हथेलियों पर वापस। सूरज की लालिमा ओढ़े,...

सच तो यह है… मैं अकेला नहीं हूँ 0

सच तो यह है… मैं अकेला नहीं हूँ

सच तो यह है, मैं अकेला नहीं हूँ, क़तई भी नहीं, जैसा तुम सोचते हो वैसा तो बिलकुल भी नहीं। साथ मेरे हैं मेरे सपने, मेरी ख़ुशमिज़ाजी, मेरी महत्वाकांक्षाएँ हमेशा मेरे मन को टटोलते,...

आओ, देखो, जी लो इन पलों को 0

आओ, देखो, जी लो इन पलों को

आओ देखो.. आज शाम के आसमान का विस्तृत फैलाव.. सुर्ख़ रंगों का बिखराव, हल्की हल्की हवा का सहज बहाव, चारों ओर चिड़ियों की चहचाहट, अपने घरौंदों को लौटती भास्कर छुपता छुपाता कहीं दूर गगन...

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बस अब नज़र आ जाओ

एक राह चुननी है… एक रुख़ करना है.. विचारों के अथाह महासागर से घिरा। असमंजस, उहापोह से सहमा मन। तुम्हें ढूँढता है, बस अब नज़र आ जाओ, बस अब तुम आ भी जाओ।

मैं धरा से हूँ 0

मैं धरा से हूँ

मैं धरा से हूँ, इस धरती का अंश, प्रतिनिधित्व करते अपनी माटी का.. मैं, तुम…हम सब। अपने संस्कारों की जड़ो की अटलता लिए। मेरे अंदर आकाश बसता है ठीक वैसा ही, जैसा तुम्हारे अंदर…...

ज़िन्दा…. 0

ज़िन्दा….

ज़िन्दा…. मृत्यु दुःख देयी है.. है परंतु एक कठोर सच यह। कोई बात करना नहीं चाहता इस पर, होती सारी बातें हैं जीवन पर। कई लोग पूरी ज़िंदगी जी नहीं पाते मगर, तुम, मैं,...

मेरा मन 0

मेरा मन

मेरा मन…. मेरा मन अब सीमित संसार में नहीं रह सकता.. उसे उड़ने के लिए एक विस्तृत व्योम चाइए… एक खुला आसमान… जहाँ का फैलाव असीमित हो, बिलकुल अनंत। नहीं चाहिए मानसिक जड़ता.. वो...

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हम…

हम… मेरा निश्चय, तुम्हारी दृढ़ता… मेरा त्याग, तुम्हारी प्रगाढ़ता। मेरा स्वाभिमान, तुम्हारी सृजनता। मेरा विवेक, तुम्हारी अटलता। मेरा विस्तार, तुम्हारी सूक्ष्मता। मेरा अलहड़पन, तुम्हारी परिपक्वता।

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