Category: MAhwash Fatima

जीते जाओ ज़िन्दगी 0

जीते जाओ ज़िन्दगी

वक़्त तो तुम बिता ही रहे हो, लम्हे तो यूँ ही लुटा ही रहे हो, अब तो एक नयी शुरुआत कर ही लो, मन की वो अनकही आवाज़ अब सुन ही लो, ज्यादा नहीं...

नन्ही सी जान 1

नन्ही सी जान

माँ की कोख में वो सुन रही थी सबकुछ, वो आवाजें जो उसके नन्हे कानो में पड़ रही थीं, महसूस कर सकती थी वो मासूम हर एहसास को, जो उसकी माँ महसूस कर रही...

O Father 2

O Father

All I have in my eyes are the memories, Of the moments we shared together, All I have in my mind are the images, Of your smiling face that gather, The bits of my...

याद आता है 2

याद आता है

रात के सन्नाटे में हर रोज़, कोई न कोई आवाज़ सुनाई देती है , सुनी सुनी सी लगती है वो आवाज़ , नींद में जो ख़लल डाल जाती है | कभी माँ की आवाज़...

“मेरी पहचान, मैं इंसान” 0

“मेरी पहचान, मैं इंसान”

जब था मैं माँ की कोख में , हो रहा था जब मेरा निर्माण , थीं मेरी भी कुछ आशाएं, थे मेरे भी कुछ अरमान , बनाया गया मैं रहीम या राम , जबकि...

“वह कोमल है, कमज़ोर नहीं” 0

“वह कोमल है, कमज़ोर नहीं”

जान गए जब वो लोग, कि है कोख में एक बेटी, जन्म से पहले ही लगा दी रोक, नन्ही साँसों पर उसकी | अगर वह पैदा हो भी गयी, जी पाई केवल कुछ ही...

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