Category: Mahadevi Verma

प्रिय! मैं हूँ एक पहेली भी – महादेवी वर्मा 0

प्रिय! मैं हूँ एक पहेली भी – महादेवी वर्मा

प्रिय! मैं हूँ एक पहेली भी ! जितना मधु जितना मधुर हास जितना मद तेरी चितवन में जितना क्रन्दन जितना विषाद जितना विष जग के स्पन्दन में पी पी मैं चिर दुख-प्यास बनी सुख-सरिता...

मैं नीर भरी दुःख की बदली – महादेवी वर्मा 0

मैं नीर भरी दुःख की बदली – महादेवी वर्मा

मैं नीर भरी दुःख की बदली, स्पंदन में चिर निस्पंद बसा, क्रंदन में आहत विश्व हँसा, नयनो में दीपक से जलते, पलकों में निर्झनी मचली ! मैं नीर भरी दुःख की बदली ! मेरा...

दीपक अब रजनी जाती रे – महादेवी वर्मा 0

दीपक अब रजनी जाती रे – महादेवी वर्मा

दीपक अब रजनी जाती रे जिनके पाषाणी शापों के तूने जल जल बंध गलाए रंगों की मूठें तारों के खील वारती आज दिशाएँ तेरी खोई साँस विभा बन भू से नभ तक लहराती रे...

अधिकार – महादेवी वर्मा 0

अधिकार – महादेवी वर्मा

वे मुस्काते फूल, नहीं जिनको आता है मुर्झाना, वे तारों के दीप, नहीं जिनको भाता है बुझ जाना; वे नीलम के मेघ, नहीं जिनको है घुल जाने की चाह वह अनन्त रितुराज,नहीं जिसने देखी...

उर तिमिरमय घर तिमिरमय – महादेवी वर्मा 0

उर तिमिरमय घर तिमिरमय – महादेवी वर्मा

उर तिमिरमय घर तिमिरमय चल सजनि दीपक बार ले! राह में रो रो गये हैं रात और विहान तेरे काँच से टूटे पड़े यह स्वप्न, भूलें, मान तेरे; फूलप्रिय पथ शूलमय पलकें बिछा सुकुमार...

क्या पूजन क्या अर्चन रे! – महादेवी वर्मा 0

क्या पूजन क्या अर्चन रे! – महादेवी वर्मा

क्या पूजन क्या अर्चन रे! उस असीम का सुंदर मंदिर मेरा लघुतम जीवन रे! मेरी श्वासें करती रहतीं नित प्रिय का अभिनंदन रे! पद रज को धोने उमड़े आते लोचन में जल कण रे!...

जीवन दीप – महादेवी वर्मा 0

जीवन दीप – महादेवी वर्मा

किन उपकरणों का दीपक, किसका जलता है तेल? किसकि वर्त्ति, कौन करता इसका ज्वाला से मेल? शून्य काल के पुलिनों पर- जाकर चुपके से मौन, इसे बहा जाता लहरों में वह रहस्यमय कौन? कुहरे...

फूल – महादेवी वर्मा 0

फूल – महादेवी वर्मा

मधुरिमा के, मधु के अवतार सुधा से, सुषमा से, छविमान, आंसुओं में सहमे अभिराम तारकों से हे मूक अजान! सीख कर मुस्काने की बान कहां आऎ हो कोमल प्राण! स्निग्ध रजनी से लेकर हास...

तितली से – महादेवी वर्मा 0

तितली से – महादेवी वर्मा

मेह बरसने वाला है मेरी खिड़की में आ जा तितली। बाहर जब पर होंगे गीले, धुल जाएँगे रंग सजीले, झड़ जाएगा फूल, न तुझको बचा सकेगा छोटी तितली, खिड़की में तू आ जा तितली!...

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