Category: Kavishala

तू इंसान कितना है 0

तू इंसान कितना है

किसी की आबरू को भेड़िए सा नोचने वाले, ज़रा खुद से कभी तो पूछ तू इंसान कितना है। किसी की शादमानी चींख में तब्दील कर के भी, नहीं तू सोचता तुझमे बसा शैतान कितना...

कशमकश 6

कशमकश

तुझे ही गले लगाकर, तेरी ही शिकायत करने का मन करता है। तुझे भुलाकर तेरी ही यादों में खो जाने का मन करता है।। रूठना भी तुझसे है मगर, मनाऐ भी तू ही कैसी...

मेरे साथ थे संस्कार 3

मेरे साथ थे संस्कार

गलती भी नहीं की ,गुनेहगार भी नही हुआ क्या ऐसा जो सजा मुझको दी गयी , मेरे संसकारो की चढ़ी चादर थी मुझपे तेरे एक तरफ़ा प्यार का शिकार हो गयी, वो भोली सी...

क्या कहु तुम्हे 0

क्या कहु तुम्हे

कैसे कह दू क्या नही हो तुम ख्वाब हो आँखों का,सुकुन हो दिल का, करार हो धड़कन का,सोच हो दिमाग का आखिर क्या क्या कहु तम्हे, सब कुछ तो तुम ही हो।।   आकिब...

कैसे होगा मिलन प्रिय 2

कैसे होगा मिलन प्रिय

तुम हो शीश महल की रानी प्रिय मैं प्यादा जिसका कोई घर-बार नही तुम हो मखमल पर ख़्वाबों को सीने वाली हम तो सोने के भी हक़दार नही अब कैसे होगा मिलन प्रिय ?...

भदेस… 0

भदेस…

जाति धर्म भाषा से बांटा अब है बात विचारों की तुम भी बांटो हम भी बांटें बांट बांट कर खायेंगे…  गाय काटी सूअर काटी अब बारी इंसानों की तुम भी काटो हम भी काटें...

हम तो नादान ही सही 0

हम तो नादान ही सही

हम तो नादान ही सही कुछ कमी तो नही बातो में फिर कंयू याद नही करते हो, रह गयी है क्या कुछ कमी जो बात नही करते हो, हम तो नादान ही सही तुम...

हम तो नादान ही सही 0

हम तो नादान ही सही

हम तो नादान ही सही कुछ कमी तो नही बातो में फिर कंयू याद नही करते हो, रह गयी है क्या कुछ कमी जो बात नही करते हो, हम तो नादान ही सही तुम...

धरा का श्रृंगार है ये वृक्ष 0

धरा का श्रृंगार है ये वृक्ष

आज धरा है रोती क्यों माली बैठा भूखा क्यों बगिया में पसरा सूखा क्यों हुआ बाढ़ सा मंज़र क्यों पूछ सको तो पूछो खुद से आज तम्हारी माँ क्यों रोती माली भूखा बगिया सुखी...

सफर 0

सफर

रक्स मे इश्क को करार खता दीजिए ये मेरा जुल्म है, मुझे सजा दीजिए!! थोडी दुआ दीजिए, कुछ दवा कीजिए मुहब्बत के मेरे सफर को हवा दीजिए!! रब की रूह होती है मोहब्बत इसमे...