Category: Harivansh Rai Bachchan

मधुशाला – हरिवंशराय बच्चन 0

मधुशाला – हरिवंशराय बच्चन

मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला, प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला, पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पाएगा, सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला।।१। प्यास...

ऐसे मैं मन बहलाता हूँ – हरिवंशराय बच्चन 0

ऐसे मैं मन बहलाता हूँ – हरिवंशराय बच्चन

सोचा करता बैठ अकेले, गत जीवन के सुख-दुख झेले, दंशनकारी सुधियों से मैं उर के छाले सहलाता हूँ! ऐसे मैं मन बहलाता हूँ! नहीं खोजने जाता मरहम, होकर अपने प्रति अति निर्मम, उर के...

अग्निपथ – हरिवंशराय बच्चन 0

अग्निपथ – हरिवंशराय बच्चन

वृक्ष हों भले खड़े, हों घने हों बड़े, एक पत्र छाँह भी, माँग मत, माँग मत, माँग मत, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ। तू न थकेगा कभी, तू न रुकेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी, कर...

जो बीत गई सो बात गई – हरिवंशराय बच्चन 0

जो बीत गई सो बात गई – हरिवंशराय बच्चन

जीवन में एक सितारा था माना वह बेहद प्यारा था वह डूब गया तो डूब गया अंबर के आंगन को देखो कितने इसके तारे टूटे कितने इसके प्यारे छूटे जो छूट गए फ़िर कहाँ...

को‌ई गाता मैं सो जाता – हरिवंशराय बच्चन 0

को‌ई गाता मैं सो जाता – हरिवंशराय बच्चन

संस्रिति के विस्तृत सागर में सपनो की नौका के अंदर दुख सुख कि लहरों मे उठ गिर बहता जाता, मैं सो जाता । आँखों में भरकर प्यार अमर आशीष हथेली में भरकर को‌ई मेरा...

जीवन की आपाधापी में – हरिवंशराय बच्चन 0

जीवन की आपाधापी में – हरिवंशराय बच्चन

जीवन की आपाधापी में कब वक़्त मिला कुछ देर कहीं पर बैठ कभी यह सोच सकूँ जो किया, कहा, माना उसमें क्या बुरा भला। जिस दिन मेरी चेतना जगी मैंने देखा मैं खड़ा हुआ...

उस पार न जाने क्या होगा – हरिवंशराय बच्चन 0

उस पार न जाने क्या होगा – हरिवंशराय बच्चन

इस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा! यह चाँद उदित होकर नभ में कुछ ताप मिटाता जीवन का, लहरालहरा यह शाखाएँ कुछ शोक भुला देती मन का, कल...

क्षण भर को क्यों प्यार किया था – हरिवंश राय बच्चन 0

क्षण भर को क्यों प्यार किया था – हरिवंश राय बच्चन

अर्द्ध रात्रि में सहसा उठकर, पलक संपुटों में मदिरा भर, तुमने क्यों मेरे चरणों में अपना तन-मन वार दिया था? क्षण भर को क्यों प्यार किया था? ‘यह अधिकार कहाँ से लाया!’ और न...

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