Category: Dr. Kumar Vinod

शून्य से शून्य का कैसा ये सफर है 0

शून्य से शून्य का कैसा ये सफर है

शून्य से शून्य का कैसा ये सफर है गुना भाग कैसे हैं ये जिंदगी के सफर में जिंदगी के उलझनें ये कैसी शून्य को पाने की कैसी जद्दोजहद है । चल रहा क्यूं खैल...

मुस्लिम ने जलाया मंदिर में जो एक दीया 0

मुस्लिम ने जलाया मंदिर में जो एक दीया

मुस्लिम ने जलाया मंदिर में जो एक दीया सुना है खूदा का वो गुनहगार हो गया बनने चला था इंसा,दिल से दिल मिलाकर ढोंगी मौलवियों के हाथों शिकार हो गया । दिल से दिल...

क्या आयेंगे राम श्मशान बच्चों के  ? 0

क्या आयेंगे राम श्मशान बच्चों के ?

हजारों लीटर तेल जला दीये लाखों रोशन करने को बुझ गया मगर एक नन्हा-सा दीया भात भात कहके उसकी सांसों की लौ फडकती रही आधार कार्ड नहीं था उसका पेट नन्हा सा अपना भरने...

माँ का आशिष को जब हाथ उठे…. होती है यारो दिवाली 0

माँ का आशिष को जब हाथ उठे…. होती है यारो दिवाली

रूठे अपने जब गले मिलें दिल में प्रीत जगे और प्यार पले होती है यारो दिवाली रंगो की रंगोली दिलवाली । जब आशीष को मां का हाथ उठे जब साया पिता का साथ चले...

राम तो प्यारा हमेशा यूं ही ठगा है 0

राम तो प्यारा हमेशा यूं ही ठगा है

हजारों लिटर तेल जला डाला कल्पना अपनी पूरी करने को बुझ गया एक दीया नन्हां भात भात भात करता आघार कार्ड नहीं था उसका पेट अपना भरने को । सुना है हेलीकॉप्टर से अयोध्या...

दिवाली लगे जो दिलवाली… मर्यादा राम की साकार हो 0

दिवाली लगे जो दिलवाली… मर्यादा राम की साकार हो

दीप जलायें कुछ ऐसे हर घर में उजाला हो जाये देख चाँदनी मेरे देश की जो चाँद दीवाना हो जाये । दूर करें बारूदी धुआं मतलब दिवाली का साकार करें हमदर्द बने कुछ टूटती...

कभी मन्दिर कभी मस्जिद… कभी मोहब्बत की कब्र को खौदा जायेगा 0

कभी मन्दिर कभी मस्जिद… कभी मोहब्बत की कब्र को खौदा जायेगा

एक बार फिर इतिहास को टटोला जायेगा कभी मन्दिर कभी मस्जिद कभी मोहब्बत को तोलेंगे तो कभी मोहब्बत की कब्र को खौदा जायेगा । नींव परेशान हैं हर पुरानी इमारत की देखा है उन्होंनें...

माँ लक्ष्मी पर तकडा़ टैक्स 0

माँ लक्ष्मी पर तकडा़ टैक्स

धन धन धन धनतेरस आया माँ सरस्वती ने हिसाब लगाया कलम निकाल लिख एक पत्रे पर माँ लक्ष्मी पर तकडा़ टैक्स लगाया । देख अठाईस प्रतिशत कर माँ लक्ष्मी लगी थोडी घबराई कैसे बच्चो...

तू ही तो मेरी बंदगी… मेरे जीने का अहसास है 0

तू ही तो मेरी बंदगी… मेरे जीने का अहसास है

सूख कर बिखर गया वो गुलाब खुशबू लिए तेरे प्यार की मेरी किताब मे जो वर्षों से रखा था । खत लिखे जो प्यार से तुमने शब्दो की स्याही को मेरे अश्कों ने मिटा...

हनुमान चालीसा हुआ है बौना… चापलूसी चालीसा अब घर घर में 0

हनुमान चालीसा हुआ है बौना… चापलूसी चालीसा अब घर घर में

कागज़ की कश्ती से शुरु हुआ जीवन काग़ज़ के रिश्तों पे खत्म हो गया है दिल की मौहब्बत अब खैल हुई पुराना चापलूसी में सारा रंगा है जमाना । हनुमान चालीसा से भी ऊपर...