Category: Dr. Kumar Vinod

रावण धरती पर कैसे कैसे 0

रावण धरती पर कैसे कैसे

जन्म लिया धरती पर सीता ने देख भक्ति इंसान की मगर भक्त नहीं पाखंडी थे मुंह पर यूं तो राम राम माथे पर टीका महादेव का सबने ही सीता राम जपा अकेली निकली सीता...

मोदी.. तल गया पकौड़े अरमानों के 0

मोदी.. तल गया पकौड़े अरमानों के

मोदी मोदी मोदी मोदी, माल्या फिर मोदी हर तरफ मोदी की गूंज है कितने प्यार से मारा ड़ाका जनता के खून पसीने की कमाई पर एक मोदी खुलवाकर जनखाता गरीबों के सौ सौ रुपये...

वो बचपन की टोलियाँ 0

वो बचपन की टोलियाँ

बहुत याद आती हैं वो बचपन की टोलियाँ गालियाँ वो छोटी छोटी वो शरारत भरी बोलियाँ वो बचपन की क्रिकेट पहले अपनी बैटिंग करना दोस्त गया सुसू करने फिर दोस्त की बैटिंग करना आउट...

अहंम प्यारा रिश्ता खा गया 0

अहंम प्यारा रिश्ता खा गया

  रोज बातें करता था लड़ता था कभी हंसता था फोन नहीं आया कुछ दिन से हल्की सी कहा सुनी के बाद अहंम बड़ा था मेरा वो नहीं किया में क्यूं करुं ऐसे ही...

भगवान कहीं मिला नहीं 0

भगवान कहीं मिला नहीं

आयतें पढ़ डालीं कुरान की सारी गीता का ज्ञान भी कंठस्थ कर डाला बाईबल भी याद है यूं तो पूरी शबद गुरु ग्रंथ के जहन में हैं सारे भगवान ढूंढने चला था मंदिर, मस्जिद,...

शून्य से शून्य का कैसा ये सफर है 0

शून्य से शून्य का कैसा ये सफर है

शून्य से शून्य का कैसा ये सफर है गुना भाग कैसे हैं ये जिंदगी के सफर में जिंदगी के उलझनें ये कैसी शून्य को पाने की कैसी जद्दोजहद है । चल रहा क्यूं खैल...

मुस्लिम ने जलाया मंदिर में जो एक दीया 0

मुस्लिम ने जलाया मंदिर में जो एक दीया

मुस्लिम ने जलाया मंदिर में जो एक दीया सुना है खूदा का वो गुनहगार हो गया बनने चला था इंसा,दिल से दिल मिलाकर ढोंगी मौलवियों के हाथों शिकार हो गया । दिल से दिल...

क्या आयेंगे राम श्मशान बच्चों के  ? 0

क्या आयेंगे राम श्मशान बच्चों के ?

हजारों लीटर तेल जला दीये लाखों रोशन करने को बुझ गया मगर एक नन्हा-सा दीया भात भात कहके उसकी सांसों की लौ फडकती रही आधार कार्ड नहीं था उसका पेट नन्हा सा अपना भरने...

माँ का आशिष को जब हाथ उठे…. होती है यारो दिवाली 0

माँ का आशिष को जब हाथ उठे…. होती है यारो दिवाली

रूठे अपने जब गले मिलें दिल में प्रीत जगे और प्यार पले होती है यारो दिवाली रंगो की रंगोली दिलवाली । जब आशीष को मां का हाथ उठे जब साया पिता का साथ चले...

राम तो प्यारा हमेशा यूं ही ठगा है 0

राम तो प्यारा हमेशा यूं ही ठगा है

हजारों लिटर तेल जला डाला कल्पना अपनी पूरी करने को बुझ गया एक दीया नन्हां भात भात भात करता आघार कार्ड नहीं था उसका पेट अपना भरने को । सुना है हेलीकॉप्टर से अयोध्या...

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