Category: Dinesh Gupta

हम जो होठों पर इतनी मुस्कान लिए बैठे हैं 0

हम जो होठों पर इतनी मुस्कान लिए बैठे हैं

हम जो होठों पर इतनी मुस्कान लिए बैठे हैं सीने में ग़मों का तूफान लिए बैठे हैं   आप जो हमसे इतना अनजान हुए बैठे हैं आप तो हमारी जान ही लिए बैठे हैं एक वो हैं जो इश्क करके कब का मुकर गए एक हमीं हैं जो अब तक ये अहसान लिए बैठे हैं मालूम है के टूटकर गिरेगा ख्वाब आँखों से फिर एक बार फिर भी दिल में वही अरमान लिए बैठे हैं !   हम जो होठों पर इतनी मुस्कान लिए बैठे हैं सीने में ग़मों का तूफान लिए बैठे हैं

इश्क में अक्सर कितने अहसान रह जाते हैं 0

इश्क में अक्सर कितने अहसान रह जाते हैं

जख़्म भर जाते हैं चोट के निशान रह जाते हैं इश्क में अक्सर कितने अहसान रह जाते हैं बेशक जान लेता है सारा जमाना इश्क में मगर अक्सर हम खुद से ही अनजान रह...

दीया अंतिम आस का (एक सिपाही की शहादत के अंतिम क्षण) 0

दीया अंतिम आस का (एक सिपाही की शहादत के अंतिम क्षण)

दीया अंतिम आस का, प्याला अंतिम प्यास का वक्त नहीं अब, हास-परिहास-उपहास का कदम बढाकर मंजिल छू लूँ, हाथ उठाकर आसमाँ पहर अंतिम रात का, इंतज़ार प्रभात का   बस एक बार उठ जाऊँ, उठकर संभल जाऊँ दोनों हाथ...

तू सचमुच आई है या तेरे आने का एहसास है 0

तू सचमुच आई है या तेरे आने का एहसास है

खिल उठी है कलियाँ सारी, चहक रहा आँगन-आँगन बहकी हुई है सारी फिज़ायें, महक रहा गुलशन-गुलशन रोम-रोम मदहोश हुआ, नाच रही धड़कन-धड़कन मौसम नया, रुत नयी, हवाओं में बात कुछ खास है तू सचमुच...

जब भी तुम याद आती हो 0

जब भी तुम याद आती हो

उम्र के हर पड़ाव में, जीवन के हर बदलाव में रात में कभी दिन में, धूप में कभी छाँव में जज़्बातों के दबाव में, भावनाओं के बहाव में ज़ख्मों पर मरहमों में, मरहमों पर...

जो कुछ भी था दरमियाँ 0

जो कुछ भी था दरमियाँ

तेरे सुर्ख होंठो की नरमियाँ याद है तेरी सर्द आहों की गरमियाँ याद है कुछ भी तो नहीं भूले हम आज भी जो कुछ भी था दरमियाँ याद है….   याद है बिन तेरे...

कैसेचंदलफ्ज़ों में सारा प्यार लिखूँ 0

कैसेचंदलफ्ज़ों में सारा प्यार लिखूँ

शब्द नए चुनकर गीत वही हर बार लिखूँ मैं उन दो आँखों में अपना सारा संसार लिखूँ मैं विरह की वेदना लिखूँ या मिलन की झंकार लिखूँ मैं कैसे चंद लफ्ज़ों में सारा प्यार लिखूँ मैं…………..   उसकी देह का श्रृंगार लिखूँ या अपनी हथेली का अंगार लिखूँ मैं साँसों का थमना लिखूँ या धड़कन की रफ़्तार लिखूँ मैं जिस्मों का मिलना लिखूँ या रूहों की पुकार लिखूँ मैं कैसे चंद लफ्ज़ों में सारा प्यार लिखूँ मैं…………..   उसके अधरों का चुंबन लिखूँ या अपने होठों का कंपन लिखूँ मैं जुदाई का आलम लिखूँ या मदहोशी में तन मन लिखूँ मैं बेताबी, बेचैनी, बेकरारी, बेखुदी, बेहोशी, ख़ामोशी कैसे चंद लफ्ज़ों में इस दिल की सारी तड़पन लिखूँ मैं   इज़हार लिखूँ, इकरार लिखूँ, एतबार लिखूँ, इनकार लिखूँ मैं कुछ नए अर्थों में पीर पुरानी हर बार लिखूँ मैं……… इस दिल का उस दिल पर, उस दिल का किस दिल पर कैसे चंद लफ्ज़ों में सारा अधिकार लिखूँ मैं………..

मेरी आँखों में मुहब्बत के मंज़र है 0

मेरी आँखों में मुहब्बत के मंज़र है

मेरी आँखों में मुहब्बत के जो मंज़र है तुम्हारी ही चाहतों के समंदर है में हर रोज चाहता हूँ कि तुझसे ये कह दूँ मगर लबो तक नहीं आता, जो मेरे दिल के अन्दर...

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