Category: Danishmohd khan

अपने अंदर का भी रावण मारो न 0

अपने अंदर का भी रावण मारो न

हिम्मत कहती है की हिम्मत हारो न तूफाँ में भी कश्ती कभी उतारो न बाहर के रावण को मारा ठीक किया अपने अंदर का भी रावण मारो न कितना अँधियारा है अंदर देखो तो...

मैं चला था नेता बनने 0

मैं चला था नेता बनने

ख़तम हुई एमएससी मिला नहीं कुछ काम सोचा नेता बन जाऊंगा रहेगा फिर आराम सच्चा नेता बन जाऊंगा करूँगा देश की सेवा फिर तो मुझको स्वर्ग में खाने को मिलेगा मेवा पुछा एक नेता...

मेरा नाम हो गया है 0

मेरा नाम हो गया है

आँखों से क़त्ल होकर बदनाम हो गया है मक़तूल पे ही सारा इलज़ाम हो गया है उसने ही ज़िन्दगी में पाईं है सब बुलंदी इस आशिकी में जो भी नाकाम हो गया है मेरी...

हम ही से सब बहाना हो रहा है 0

हम ही से सब बहाना हो रहा है

सबसे मिलना मिलाना हो रहा है हम ही से सब बहाना हो रहा है तुम्हारा दर्द लिखता जा रहा  हूँ मोहब्बत का फ़साना हो रहा  है ग़ज़ल बातें तुम्हारी कर रही  है मेरा क़ायल...

सागर का मेरे किनारा नहीं है 0

सागर का मेरे किनारा नहीं है

जिसे गिर के उठना गंवारा नहीं है उसे ज़िन्दगी ने संवारा नहीं है मुझे उसकी आवाज़ क्यों आ रही है मुझे जब की उसने पुकारा नहीं है उसे क्या खबर कितना नादान है वो हमें...

हर सिम्त दिखाई दूंगा 0

हर सिम्त दिखाई दूंगा

है यही हाल की रेहमत की दुहाई दूंगा हाय क्या हश्र में उस रब को सफाई दूंगा है ये तौहीने मोहब्बत तुझे रुस्वा देखूं उसने पुछा  भी तो मैं कैसे गवाही दूंगा मेरे अलफ़ाज़...

खिलाना था जिसे वो खा रहा है 0

खिलाना था जिसे वो खा रहा है

महल तामीर करता जा रहा है खिलाना था जिसे वो खा रहा है वो जिसने हाथ जोड़े थे यहाँ पर वो अब आँखें हमें दिखला रहा है सितारे उसके रोशन हो रहे हैं मेरे...

उसको कभी अश्क़बार देख 0

उसको कभी अश्क़बार देख

कोई खबर भी सुन ले या फिर इश्तेहार देख सब झूठ का ग़ुबार है तू जितनी बार देख बर्बादियों में लुत्फ़ बहुत आएगा तुझे इस दिल को करके तू भी कभी बेक़रार देख दुनिया...