Category: Bharatendu Harishchandra

बुत-ए-काफ़िर जो तू मुझ से ख़फ़ा है – भारतेंदु हरिश्चंद्र 0

बुत-ए-काफ़िर जो तू मुझ से ख़फ़ा है – भारतेंदु हरिश्चंद्र

बुत-ए-काफ़िर जो तू मुझ से ख़फ़ा हो नहीं कुछ ख़ौफ़ मेरा भी ख़ुदा है ये दर-पर्दा सितारों की सदा है गली-कूचा में गर कहिए बजा है रक़ीबों में वो होंगे सुर्ख़-रू आज हमारे क़त्ल...

दशरथ विलाप – भारतेंदु हरिश्चंद्र 0

दशरथ विलाप – भारतेंदु हरिश्चंद्र

कहाँ हौ ऐ हमारे राम प्यारे । किधर तुम छोड़कर मुझको सिधारे ।। बुढ़ापे में ये दु:ख भी देखना था। इसी के देखने को मैं बचा था ।। छिपाई है कहाँ सुन्दर वो मूरत...

नींद आती ही नहीं…(हज़ल) – भारतेंदु हरिश्वंद्र 0

नींद आती ही नहीं…(हज़ल) – भारतेंदु हरिश्वंद्र

नींद आती ही नहीं धड़के की बस आवाज़ से तंग आया हूँ मैं इस पुरसोज़ दिल के साज से दिल पिसा जाता है उनकी चाल के अन्दाज़ से हाथ में दामन लिए आते हैं...

मुकरियाँ – भारतेंदु हरिश्चंद्र 0

मुकरियाँ – भारतेंदु हरिश्चंद्र

सीटी देकर पास बुलावै। रुपया ले तो निकट बिठावै॥ लै भागै मोहि खेलहिं खेल। क्यों सखि साजन, नहिं सखि रेल॥ सतएँ-अठएँ मा घर आवै। तरह-तरह की बात सुनावै॥ घर बैठा ही जोड़ै तार। क्यों...

गाती हूँ मैं…(हज़ल) – भारतेंदु हरिश्चन्द्र 0

गाती हूँ मैं…(हज़ल) – भारतेंदु हरिश्चन्द्र

गाती हूँ मैं औ नाच सदा काम है मेरा ए लोगो शुतुरमुर्ग परी नाम है मेरा फन्दे से मेरे कोई निकलने नहीं पाता इस गुलशने आलम में बिछा दाम है मेरा दो-चार टके ही...

बुत-ए-काफ़िर जो तू मुझ से ख़फ़ा है – भारतेंदु हरिश्चंद्र 0

बुत-ए-काफ़िर जो तू मुझ से ख़फ़ा है – भारतेंदु हरिश्चंद्र

बुत-ए-काफ़िर जो तू मुझ से ख़फ़ा हो नहीं कुछ ख़ौफ़ मेरा भी ख़ुदा है ये दर-पर्दा सितारों की सदा है गली-कूचा में गर कहिए बजा है रक़ीबों में वो होंगे सुर्ख़-रू आज हमारे क़त्ल...

बाल बिखेरे आज परी तुर्बत पर मेरे आएगी – भारतेंदु हरिश्चंद्र 0

बाल बिखेरे आज परी तुर्बत पर मेरे आएगी – भारतेंदु हरिश्चंद्र

बाल बिखेरे आज परी तुर्बत पर मेरे आएगी मौत भी मेरी एक तमाशा आलम को दिखलाएगी महव-ए-अदा हो जाऊँगा गर वस्ल में वो शरमाएगी बार-ए-ख़ुदाया दिल की हसरत कैसे फिर बर आएगी काहीदा ऐसा...

सब भाँति दैव प्रतिकूल… – भारतेंदु हरिश्चंद्र 0

सब भाँति दैव प्रतिकूल… – भारतेंदु हरिश्चंद्र

सब भाँति दैव प्रतिकूल होय यहि नासा। अब तजहु बीरवर भारत की सब आसा।। अब सुख सूरज को उदय नहीं इत ह्नैहै। मंगलमय भारत भुव मसान ह्नै जै है।।

बँसुरिआ मेरे बैर परी – भारतेंदु हरिश्चंद्र 0

बँसुरिआ मेरे बैर परी – भारतेंदु हरिश्चंद्र

बँसुरिआ मेरे बैर परी। छिनहूँ रहन देति नहिं घर में, मेरी बुद्धि हरी। बेनु-बंस की यह प्रभुताई बिधि हर सुमति छरी। ’हरीचंद’ मोहन बस कीनो, बिरहिन ताप करी॥

सुनौ सखि बाजत है मुरली – भारतेंदु हरिश्चंद्र 0

सुनौ सखि बाजत है मुरली – भारतेंदु हरिश्चंद्र

सुनौ सखि बाजत है मुरली। जाके नेंक सुनत ही हिअ में उपजत बिरह-कली। जड़ सम भए सकल नर, खग, मृग, लागत श्रवन भली। ’हरीचंद’ की मति रति गति सब धारत अधर छली॥

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