Category: Ashish Vidhuri

याद-ए-निगार 0

याद-ए-निगार

अंदरखाने उठते कुछ तुफान हमें ताडने लगे है हम अब याद-ए-निगार कसकर आढने लगे है!! मुंतजिरी की अदायगी का जिम्मा है सर हमारे और लोग हमे मगरूर कहकर छोडने लगे है!! हर गम से...

तंहा सफर करने से 0

तंहा सफर करने से

थोडा तो सुकून है तंहा सफर करने से कही बेहतर है ये उम्मीदो मे जलने से!! अंधेरा तो छटता नही राह-ए-हयात का क्या होता है सूरज के रोज निकलने से!! मेरी जिद मेरी आरजू...

घाव भर जाता है 0

घाव भर जाता है

बिना उससे मिले एक लंबा अरसा गुजर जाता है इससे मुहब्बत का लिबास मन से नही उतर जाता है। जाने कौन-सा अमृत वो अपने लबो पर रखता है वो मुस्कुरा देता है और मेरा...

अपने सहारे नही 0

अपने सहारे नही

हम जिनके है वो हमारे नही दिल अपना है, अपने सहारे नही!! वापिस जमीं पर लौटे तो कैसे वो चश्म समंदर है, किनारे नही!! जमीं पर जन्नत से जो इत्तेफाक रखते नही उन्होंने चाँद...

तंहाई दिल पर छाने लगी है 2

तंहाई दिल पर छाने लगी है

तंहाई दिल पर छाने लगी है हवा भी जिस्म को जलाने लगी है। इंतजार करते-करते बीत जाती है हर रात बेआराम जाने लगी है। समंदर-ए-इश्क मे जब से डूबे है खुशियां सारी ठिकाने लगी...

फासला 0

फासला

अदावतो का एक सूरज ढल भी सकता था फासलो का समाधान निकल भी सकता था!! हाथ तूने मेरी तरफा बढाया तो होता मै कांटों पर हंसकर चल भी सकता था!! तू वक्त मे खोता...

नया उजाला 0

नया उजाला

परिसरो पर पडा है ताला क्या यही था नया उजाला!! हथियारो से टूटते नही हौसले लाठी अाजमाओ चाहे भाला!!

ऐसे मै शायर होता हूं 0

ऐसे मै शायर होता हूं

कहने को तेरेे मेरे दरमियाँ इक बडा फासला है समझने को तुझसे ज्यादा कोई करीब नही मिरे!! रात के आखिरी पहर मे जब मै शायरी गढ रहा होता हूं जितना दिल पास धडकन के...

जनाजे मेरी रूह के रोज उठते हैं 0

जनाजे मेरी रूह के रोज उठते हैं

जनाजे मेरी रूह के रोज उठते है रोज मेरे ख्वाब टूटकर गिरते है!! हर दिन नया आशियाना बनता है हर रोज ये ख्याल संवरते है!! नामुमकिन कुछ भी नही होता है यहां काली रात...

बगावती कितना है 0

बगावती कितना है

ख्वाब जलाकर सुकून से कौन सो पाता है चाहकर भी महबूब से रूसवा कौन होे पाता है। आंखों की तिलस्मी जेल मे बंद परिंदा बज्म-ए-इश्क से आजाद कब हो पाता है। फासला मीलो का...