Category: Ashish Saxena

बैन पटाखे होते हैं 0

बैन पटाखे होते हैं

सियासत मे भी तुम देखो क्या खेल तमाशे होते हैं सेल मे बिकती हैं मोटर, और बैन पटाखे होते हैं स्वछ हवाओं को ढून्ढ्ने नेता जी पहाड़ पे जायेङे उसी काफिले मे कई वाहन...

यादें कुछ बारीक रह गई 0

यादें कुछ बारीक रह गई

हज़ारों तारीखों मे बस याद एक तारीख़ रह गई कि मिटाने पर भी लाख, यादें कुछ बारीक रह गई वक्त मे लपेट कर रख छोड़े थे लम्हे जहाँ हमने वहीं देखा तो नम आन्खो...

कैसा हिन्दुस्तान 0

कैसा हिन्दुस्तान

कुछ ईमानदार तो कुछ बेइमान दिखता हूँ जाने अब मै कैसा हिन्दुस्तान दिखता हूँ इज़्ज़त है दिल मे हर एक रन्ग्ग् कि मुझमे फिर भी क्यों मैं सिर्फ एक रन्ग्ग् कि पहचान दिखता हूँ...

लौट के आके बापू देखो 0

लौट के आके बापू देखो

गांधी जयंती २०१७ में मेरी नज़र से हिन्दुस्तान विध्वंस का अब परवान चढा है गुलशन बन शमशान खड़ा है लौट के आके बापू देखो कैसा चोटिल ये हिन्दुस्तान पड़ा है शिक्षा के बाजारों मे...

हूँ शब्द ‘अहंकार ‘ मैं 0

हूँ शब्द ‘अहंकार ‘ मैं

मैं राग में मैं द्वेष में हूँ सज्ज मैं हर भेष में प्रचंड से विनाश में उद्दंड से प्रयास में मैं कोशिशों की जीत हूँ मैं मैं में जीती रीत हूँ मैं हार का...

प्रभु आये थे – व्यंग 0

प्रभु आये थे – व्यंग

प्रभु आये थे – व्यंग हास्य निद्रा में मैं गहन था जब एक अद्भुत सा आभास हुआ स्वप्न में आये थे भगवन और बैठना उनके पास हुआ धन्य हुआ हूँ भगवन जो आप स्वयं...

लौटता बचपन 0

लौटता बचपन

लौटता बचपन एक दादा अपने पोते के साथ अपनी दोस्ती के रिश्ते को कैसे बयां करता है, इसकी झलक दर्शाने की मैंने एक नन्ही कोशिश की है- मेरी उम्र का मेरे इस घर में...

सफर 0

सफर

है सफर ये पतथरो का, फिर भी एक् आस मे हूँ ठोकरे बतला रही है, मन्ज़िलो के पास मे हूँ मील पत्थरो से मिलता चल रहा हूँ नयी चुनौतियों की फिर भी प्यास में...

विस्थापित हिन्दी- हिन्दी दिवस 0

विस्थापित हिन्दी- हिन्दी दिवस

दुनिया जिसको भूल के बैठी, उस साहित्य की कहानी हूँ हिन्दी मे हि सार है सारा, पर विस्थापित सी रानी हूँ मैने जाई अवधि उर्दु, है मुझ्मे हि प्रेम व ओज बसा हो गया...

मैं कोशिश करता जाता हूँ 0

मैं कोशिश करता जाता हूँ

मैं कोशिश करता जाता हूँ मैं कोशिश करता जाता हूँ इस टूटते आत्मबल को बचाने को मैं कोशिश करता जाता हूँ हारते रुकते कदमो को जमाने को मैं कोशिश करता जाता हूँ सौ प्रहार...