Category: Amit Tripathi

हम तुम्हें भूल गए जेपी 0

हम तुम्हें भूल गए जेपी

हम तुम्हें भूल गए जेपी सियासत के चकाचौंध उजियरों में बुझा दी हमने मशाल तुम्हारी सत्ता के भ्रष्ट गलियारों में..। बोयी थी जो फ़सल आपने हमने उसका ही तो पान किया वसुल तुम्हारे, अख़लाक़...

हिंदी दिवस 1

हिंदी दिवस

हिंदी तन ,हिंदी मन ,हिंदी जीवन तुझ से अर्जित है ये सामर्थ्य लिखना ,बोलना , और अर्जन हे माँ हिंदी स्वीकार करो मेरा तुच्छ सा ये तर्पण.. हिंदी तन ,हिंदी मन ,हिंदी जीवन ..!! नवकंठ से निकली हर ध्वनि तुम्हारी नव उत्कंठा की हर व्यग्नि तुम्हारी तुम्हीं से सृजित है  साहित्य हमारा बह रही ज्ञान की अविरल धारा जो कुछ है अर्जित सब कुछ तुमको प्रत्यर्पण..। हिंदी तन ,हिंदी मन ,हिंदी जीवन दीन की प्रलाप तुम्हीं हो दीनानाथ की पुकार तुम्हीं हो ज्ञानी मुनियों की विचार तुम्हीं हो मूढ़ों को भी स्वीकार तुम्हीं हो प्रतिस्पर्धा की धार तुम्हीं हो कृतिकों की रोज़गार तुम्हीं हो महाजनों का व्यापार तुम्हीं हो. क्यूँ पुकारूँ  तुझे सिर्फ़ एक दिन माँ हमारा हर क्षण तुमको समर्पण..। हिंदी तन ,हिंदी मन ,हिंदी जीवन हिंदी दिवस की शुभकामना..।। #अमित #हिंदी_दिवस

थोड़ा तस्दीक़ हम भी करें 0

थोड़ा तस्दीक़ हम भी करें

जब देनी पड़े गवाही हर वक़्त बेटे को माँ का लाल होने के जब पूछे जायें हर वक़्त आपसे सवाल आपके होने का जब सड़कों पे घूमते हों लोग करने को पैमाईश उसके जज़्बातों...

लिलाधर श्याम..। 0

लिलाधर श्याम..।

कृष्ण कहाँ एकाकी मित्रवर कृष्ण कहाँ एकाकी थे वो तो अवतार परम के, पर मानव रूप में दिखानी थी झाँकी कृष्ण कहाँ एकाकी..। जाते ना वो छोड़ जशोदा क्या माँ के उस रूप को...

जीएसटी से नहीं मची कोई लूट…II 1

जीएसटी से नहीं मची कोई लूट…II

जीएसटी से नहीं मची कोई लूट मित्र नहीं मची कोई लूट..। ना फैलावों कोई झूठ मित्र, ना फैलावों कोई झूठ ..।। कहने सुनने पर ना जाओ ना करो मिथ्या प्रचार..। बढ़ेगी पारदर्शिता इससे ,सुदृढ़...

मूल और ब्याज….. 0

मूल और ब्याज…..

वो घिसी हुयी चप्पल और धोती घुटने तक  फफक रहा था , बस स्टैंड पर हाथ में लेकर  चादर में लिपटा  इक बुत इक पत्थर, निर्जीव पड़ा वो  आने वाला कल..।। सुना था हवा ...

सिलसिला 0

सिलसिला

हर साल जब फूटती है धान की बालियाँ बरसते है जम के बादल उस बिलबिलाती गंदी नालियों, पगडंडियों और खेतों से से निकलता है एक तूफ़ानी तपन हज़ारों नौनिहाल जूझते हैं हर साल इस...

बगावत 0

बगावत

जुर्रत की है जो मैंने तेरे गुरुर से टकराने की, उम्मीद तुझसे थी मुझे इसी नजराने की I नियत में तेरे खोट थी ये तो हम जानते थे पर इतना गिर जायेगा, लोग कहते...

एक नयी शुरआत करते हैं. 0

एक नयी शुरआत करते हैं.

सुना है मेरे शहर की हवा में जहर है. चलो मिल के इसे साफ करते हैं। . हर एक नयी सुबह पे एक नयी शुरआत करते हैं.. .. !! न जाने क्यूँ अब ठंड...

लिखते रहिये आदत बुरी नहीं है 0

लिखते रहिये आदत बुरी नहीं है

कभी कोई शिकवा हो कोई शिकायत हो या हो कोई इज़हार-ए-मुहब्बत दिल में ना रखिये बोझ कह डालिए ना ज़ुबान पे आए बात तो लिख डालिए हर बात कह के कही जाए, ये ज़रूरी...