Category: Akib Javed

किस्मत का खेल 0

किस्मत का खेल

देख तमाशा किस्मत का कैसा कैसा खेल दिखाये कुछ को देखो सब दे जाये कुछ के कुछ हाथ ना आये खेलने कूदने की उम्र में वो देखो पैसे कमाने जाये नही कोसती दुनिया को...

अपना सौदा करते सनम देखते हैं 0

अपना सौदा करते सनम देखते हैं

चुराकर दिल मेरा वो ऐसे देखते हैं हुए दिल पे सारे सितम देखते हैं। अधूरी मुहब्बत का ऐसा फसाना वो शुर्ख गुलाबों में हम देखते हैं। धड़कन में बस कर रूह खोजते हैं हैं...

फ़िक्रों अदा ले आये हैं ग़ालिब के घराने से 0

फ़िक्रों अदा ले आये हैं ग़ालिब के घराने से

छूट गया हाथ उसका एक उसके जाने से, टूट गयी उम्मीद सारी, उम्र के सिरहाने से। महबूब ने जो बुने हैं चाँद तारे मेरे दामन में अब सँवर के दिखेगा हुस्न मेरे दिखाने से।...

ख्वाबो में उनसे मुलाकात करते रहे 0

ख्वाबो में उनसे मुलाकात करते रहे

हम उनसे दिल की बात करते रहे ख्वाबो में उनसे मुलाकात करते रहे देख कर वो नज़रअंदाज करते रहे बेवजह हम खून परवाज करते रहे उनकी यादो में हम अब जागकर अपनी नींदों को...

मंज़िल 0

मंज़िल

ये जीवन हैं जीवन में सब होना हैं कुछ पाना हैं तो कुछ खोना हैं थोड़ा उम्मीद हैं तो ना उम्मीदी भी संघर्ष के पथ पर ऐसे बढ़ते जाना हैं मंज़िलो का यहाँ कुछ...

मधुशाला 0

मधुशाला

होश ना रहा कुछ हमे,ग़मो को अपने दबाये हँसता,मुस्कुराता,लड़खड़ाता खुद को डुबाये तमाम मुश्किलों को अपने नज़रो में समाये नही मिल रहा हमे अब कोई कुछ भी उपाय मस्जिद गया,गिरजाघर गया,गया मैं शिवालय ढूंढता...

आशिकी छुपी हैं,तिश्नगी दिखी हैं 0

आशिकी छुपी हैं,तिश्नगी दिखी हैं

आशिकी छुपी हैं,तिश्नगी दिखी हैं बेखुदी जली हैं, शायरी लिखी हैं आदमी कही हैं, सादगी नही हैं रौशनी बुझी हैं,जिंदगी ढही हैं बेखुदी वही हैं, बेरुखी दिखी हैं डायरी वही हैं, आशकी नयी हैं...

सुनने वालों के लिये सब शायरी हैं 0

सुनने वालों के लिये सब शायरी हैं

तिश्नगी को यूं अपने दिल में समाये छिपी रोशनी में तेरी बेरुखी दिखी हैं दिल्लगी को अपने दिल में बसाये सुनने वालो के लिये सब शायरी हैं बेकसी सी हैं कुछ दिल में मेरे...

बंद मुट्ठी में हासिल फ़क्त इंतज़ार के कुछ नही! 0

बंद मुट्ठी में हासिल फ़क्त इंतज़ार के कुछ नही!

इस कदर चाहूँ तुझे अब मेरा दम निकल जाये देखूँ,सोचूँ,तुझे पाऊँ अब ये अरमान निकल जाये वो तुझे देखा जब नायाब संगमरमर सा तराशा हुआ मुमताज़ को सोच कर शाहजहाँ का दम निकल जाये...

आशिकी 0

आशिकी

दिल में चाहत छुपाये मिलने को तुझसे चाहे बावला सा हैं कँहा कुछ जानता हैं ये गगन,अम्बर छूने को चाहे नदियाँ, पर्वत, चाँद,तारे लाने को माने आशिक मिज़ाज हैं मेरी कँहा मानता हैं ये...

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