Category: Akib Javed

बदलेगा समाज 0

बदलेगा समाज

हमेशा सोचता हूँ कि आखिर मैं क्यू सोचता हूँ गर नही बदलेगा जमाना तो फिर ना बदलेगा समाज! लेकिन बाद में सोंचते हुये फिर ये सोचता हूँ गर आज हम ना बदले फिर तो...

बेमौसम पतझड़ 0

बेमौसम पतझड़

रेत के जैसे फिसलती रहती हैं जिंदगी पानी के मानिंद बहती चली जा रही हैं! कौन कंहा किस ओर कब चला जा रहा हैं समुद्र बिना किनारे के बहते चला जा रहा हैं। सोचते...

तुम्हारी आँखों में 0

तुम्हारी आँखों में

झील कंकड़ी मछली और लहर तुम्हारी आँखों में देख रहा हूँ भटकी हुई भँवर तुम्हारी आँखों में। धुप छाँव बरसात ठण्ड हर मौसम तुम्हारी आँखों में कुछ घबराया सा रहता हैं डर तुम्हारी आँखों...

कम्बख्त कुछ कमी सी हैं जिंदगी में 0

कम्बख्त कुछ कमी सी हैं जिंदगी में

कम्बख्त कुछ कमी सी हैं जिंदगी में बहुत कुछ सोचा पर कुछ मिला नही। बचपन में पढ़ते,खेलते,गिरते सम्भलते बहुत कुछ सोचा पर कुछ मिला नही। खैर बचपन के वो सपने सपने ही होते हैं...

इस दिवाली रोशन करे 0

इस दिवाली रोशन करे

उत्साह,उमंग में सरोबार सारा जग यंहा जगमग प्रकाश से युक्त संसार अब यंहा देखो आज खुशियो का त्यौहार हैं सभी लोग आज साथ साथ हैं,लेकिन थोड़ा ध्यान उधर भी अब दो जिनका कोई भी...

याद करता हूँ 6

याद करता हूँ

गाहे बेगाहे मै मुस्कुराता हूँ अपने सारे गम भूल जाता हूँ सब की पहली सुबह याद करता हूँ रात की चांदनी में याद करता हूँ चाहे मौसम की हो पहली बरसात वो एक कप...

ताज 0

ताज

दो प्रेमियो के प्यार के स्वप्न को देखता हैं संसार जमना जी के प्रांगण में हैं ताजमहल का विस्तार ~Akib Javed #tajmahal

निवेदन दिवाली त्यौहार पर 0

निवेदन दिवाली त्यौहार पर

कुम्हारन बैठी रोड़ किनारे,लेकर दीये दो-चार। जाने क्या होगा अबकी,करती मन में विचार।। याद करके आँख भर आई,पिछली दीवाली त्योहार। बिक न पाया आधा समान,चढ गया सर पर उधार।। सोंच रही है अबकी बार,दूँगी...