Category: Abhishek Mandloi

मेरे अन्दर 0

मेरे अन्दर

कल रात बहुत कुछ पाया मैने मेरे अंदर मैं रात भर जागा वो चैन से सोया मेरे अंदर ज़हन में कई सवाल थे आँखों में नमी भी थी लव मुस्कुराये और वो टूट कर...

मेरे अन्दर 4

मेरे अन्दर

कल रात बहुत कुछ पाया मैने मेरे अंदर मैं रात भर जागा वो चैन से सोया मेरे अंदर ज़हन में कई सवाल थे आँखों में नमी भी थी लव मुस्कुराये और वो टूट कर...

एक मुसाफ़िर 0

एक मुसाफ़िर

एक मुसाफ़िर अपने सफ़र से यू दूर हुआ जो देखा अपने बच्चो को तो मजबूर हुआ थक हार कर बैठ गया वापस अपनी कुर्सी पर ऐसे कोई शक़्स अपने खाबो से दूर हुआ अब...

घर से जाने कौन चेहरा लिए चला हूँ 0

घर से जाने कौन चेहरा लिए चला हूँ

जो अधूरी थी मंज़िले उन्हें पाने चला हूँ मैं कई ख़ाब लिये पूराने चला हूँ कोई मेरे सफ़र का रास्ता न बतलाए मुझे मैं ख़ुद को फिर से आज़माने चला हूँ लड़ रहा हूँ...

जो अधूरी थी मंज़िले उन्हें पाने चला हूँ 0

जो अधूरी थी मंज़िले उन्हें पाने चला हूँ

जो अधूरी थी मंज़िले उन्हें पाने चला हूँ मैं कई ख़ाब लिये पूराने चला हूँ कोई मेरे सफ़र का रास्ता न बतलाए मुझे मैं ख़ुद को फिर से आज़माने चला हूँ लड़ रहा हूँ...

ख़ुद की तलाश में निकला हूँ बड़ी देर से 0

ख़ुद की तलाश में निकला हूँ बड़ी देर से

ख़ुद की तलाश में निकला हूँ बड़ी देर से ख़ुद से ख़ुद का पता पूछ रहा हूँ बड़ी देर से अजीब तमाशा फैलाया है बाज़ार में मैंने इस ज़माने को लुत्फ़ दे रहा हूँ...

कुछ में अब भी उड़ान बाकी है 0

कुछ में अब भी उड़ान बाकी है

कुछ परिंदों ने आसमानो को छुआ है चलो कुछ में अब भी उड़ान बाकी है आँखों मे ख़ाब और सीने में बैचेनी है चलो कुछ में अब भी अरमान बाकी है कुछ लड़ रहे...

मेरे बचपन की कुछ बाते कुछ कहानी 0

मेरे बचपन की कुछ बाते कुछ कहानी

मेरे बचपन की कुछ बाते कुछ कहानी, वो गुल्ली-डंडा, सितोलिया,बर्फ-पानी… वो पापा के कंधे से देखे मेले, मम्मी ने सिखाई बाते सयानी… चलती थी दूर तक कागज़ की नाव मेरी, जब भी बरसता था...

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