जॉन एलिया

जीवन परिचय – (विकिपीडिया से)


जॉन एलिया उर्दू के एक महान शायर हैं। इनका जन्म 14 दिसंबर 1931 को अमरोहा में हुआ। यह अब के शायरों में सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले शायरों में शुमार हैं।

शायद, यानी,गुमान इनके प्रमुख संग्रह हैं इनकी मृत्यु 8 नवंबर 2004 में हुई।

जौन सिर्फ पाकिस्तान में ही नहीं हिंदुस्तान व पूरे विश्व में अदब के साथ पढ़े और जाने जाते हैं।

शेर:

आईनों को ज़ंग लगा

अब मैं कैसा लगता हूँ

——
आज बहुत दिन ब’अद मैं अपने कमरे तक आ निकला था

जूँ ही दरवाज़ा खोला है उस की ख़ुश्बू आई है
——
आज मुझ को बहुत बुरा कह कर

आप ने नाम तो लिया मेरा
—–
आख़िरी बात तुम से कहना है

याद रखना न तुम कहा मेरा

—–

अब जो रिश्तों में बँधा हूँ तो खुला है मुझ पर

कब परिंद उड़ नहीं पाते हैं परों के होते

—–

अब ख़ाक उड़ रही है यहाँ इंतिज़ार की

ऐ दिल ये बाम-ओ-दर किसी जान-ए-जहाँ के थे

——
अब कि जब जानाना तुम को है सभी पर ए’तिबार

अब तुम्हें जानाना मुझ पर ए’तिबार आया तो क्या

—–

अब मिरी कोई ज़िंदगी ही नहीं

अब भी तुम मेरी ज़िंदगी हो क्या
——
अब नहीं मिलेंगे हम कूचा-ए-तमन्ना में

कूचा-ए-तमन्ना में अब नहीं मिलेंगे हम

—–
अब तो हर बात याद रहती है

ग़ालिबन मैं किसी को भूल गया

——
अब तो उस के बारे में तुम जो चाहो वो कह डालो

वो अंगड़ाई मेरे कमरे तक तो बड़ी रूहानी थी
——
अब तुम कभी न आओगे यानी कभी कभी

रुख़्सत करो मुझे कोई वादा किए बग़ैर

——
अपना रिश्ता ज़मीं से ही रक्खो

कुछ नहीं आसमान में रक्खा

——

अपने अंदर हँसता हूँ मैं और बहुत शरमाता हूँ

ख़ून भी थूका सच-मुच थूका और ये सब चालाकी थी

——
अपने सब यार काम कर रहे हैं

और हम हैं कि नाम कर रहे हैं
——
अपने सभी गिले बजा पर है यही कि दिलरुब

मेरा तिरा मोआ’मला इश्क़ के बस का था नहीं

——
अपने सर इक बला तो लेनी थी

मैं ने वो ज़ुल्फ़ अपने सर ली है
——
इक अजब आमद-ओ-शुद है कि न माज़ी है न हाल

‘जौन’ बरपा कई नस्लों का सफ़र है मुझ में
——
इक अजब हाल है कि अब उस को

याद करना भी बेवफ़ाई है
——
इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊँ

वगरना यूँ तो किसी की नहीं सुनी मैं ने
——
इन लबों का लहू न पी जाऊँ

अपनी तिश्ना-लबी से ख़तरा है

——
इतना ख़ाली था अंदरूँ मेरा

कुछ दिनों तो ख़ुदा रहा मुझ में
——
उस गली ने ये सुन के सब्र किया

जाने वाले यहाँ के थे ही नहीं
——
उस के होंटों पे रख के होंट अपने

बात ही हम तमाम कर रहे हैं

——
उस ने गोया मुझी को याद रखा

मैं भी गोया उसी को भूल गया
——
ऐ शख़्स मैं तेरी जुस्तुजू से

बे-ज़ार नहीं हूँ थक गया हूँ

 

^^ (Source Rekhta.Org)

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