केदारनाथ सिंह

जीवन परिचय – (विकिपीडिया से)

केदारनाथ सिंह(जन्म १९३४ ई.) हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं।


Kedarnath-Singh kavishala

केदारनाथ सिंह (जन्म १९३४ ई.) हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। वे अज्ञेय द्वारा सम्पादित तीसरा सप्तक के कवि हैं। भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा उन्हें वर्ष 2013 का 49 वां ज्ञानपीठ पुरस्कार दिये जाने का निर्णय किया गया।[1] वे यह पुरस्कार पाने वाले हिन्दी के 10 वें लेखक हैं।

केदारनाथ सिंह का जन्म 1 july 1934 ई॰ में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के चकिया गाँव में हुआ था। उन्होंने बनारस विश्वविद्यालय से 1956 ई॰ में हिन्दी में एम॰ए॰ और 1964 में पी-एच॰ डी॰ की उपाधि प्राप्त की। वे जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा केंद्र में बतौर आचार्य और अध्यक्ष काम कर चुके हैं।

केदारनाथ सिंह की कवितायें 

फागुन का गीत – केदारनाथ सिंह

गीतों से भरे दिन फागुन के ये गाए जाने को जी करता! ये बाँधे नहीं बँधते, बाँहें- रह जातीं खुली की खुली, ये तोले नहीं तुलते, इस पर ये आँखें तुली की तुली, ये...

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दुपहरिया – केदारनाथ सिंह

झरने लगे नीम के पत्ते बढ़ने लगी उदासी मन की, उड़ने लगी बुझे खेतों से झुर-झुर सरसों की रंगीनी, धूसर धूप हुई मन पर ज्यों- सुधियों की चादर अनबीनी, दिन के इस सुनसान पहर...

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